श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.51.39

दशम स्कन्ध · अध्याय 51 · अथैकपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

कालत्रयोपपन्‍नानि जन्मकर्माणि मे नृप।

अनुक्रमन्तो नैवान्तं गच्छन्ति परमर्षयः॥ ३९

kālatrayopapannāni janmakarmāṇi me nṛpa|

anukramanto naivāntaṃ gacchanti paramarṣayaḥ|| 39

अर्थ

राजन्! सनक-सनन्दन आदि परमर्षिगण मेरे त्रिकालसिद्ध जन्म और कर्मोंका वर्णन करते रहते हैं, परन्तु कभी उनका पार नहीं पाते॥ ३९॥

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