श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.51.36

दशम स्कन्ध · अध्याय 51 · अथैकपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

एवं सम्भाषितो राज्ञा भगवान् भूतभावनः।

प्रत्याह प्रहसन् वाण्या मेघनादगभीरया॥ ३६

evaṃ sambhāṣito rājñā bhagavān bhūtabhāvanaḥ|

pratyāha prahasan vāṇyā meghanādagabhīrayā|| 36

अर्थ

जब राजा मुचुकुन्दने इस प्रकार कहा, तब समस्त प्राणियोंके जीवनदाता भगवान् श्रीकृष्णने हँसते हुए मेघध्वनिके समान गम्भीर वाणीसे कहा—॥ ३६॥

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