श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.51.35

दशम स्कन्ध · अध्याय 51 · अथैकपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

तेजसा तेऽविषह्येण भूरि द्रष्टुं न शक्‍नुमः।

हतौजसो महाभाग माननीयोऽसि देहिनाम्॥ ३५

tejasā te'viṣahyeṇa bhūri draṣṭuṃ na śaknumaḥ|

hataujaso mahābhāga mānanīyo'si dehinām|| 35

अर्थ

महाभाग! आप समस्त प्राणियोंके माननीय हैं। आपके परम दिव्य और असह्य तेजसे मेरी शक्ति खो गयी है। मैं आपको बहुत देरतक देख भी नहीं सकता॥ ३५॥

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