अवश्य उसके पापोंने ही उसे जलाकर भस्म कर दिया है। इसके बाद शत्रुओंके नाश करनेवाले परम सुन्दर आपने मुझे दर्शन दिया॥ ३४॥
सोऽपि भस्मीकृतो नूनमात्मीयेनैव पाप्मना।
अनन्तरं भवाञ्छ्रीमान् लक्षितोऽमित्रशातनः॥ ३४
अवश्य उसके पापोंने ही उसे जलाकर भस्म कर दिया है। इसके बाद शत्रुओंके नाश करनेवाले परम सुन्दर आपने मुझे दर्शन दिया॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.51.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 456) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/51/34/