॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.50.54
वास्तोष्पतीनां च गृहैर्वलभीभिश्च निर्मितम्।
चातुर्वर्ण्यजनाकीर्णं यदुदेवगृहोल्लसत्॥ ५४
vāstoṣpatīnāṃ ca gṛhairvalabhībhiśca nirmitam|
cāturvarṇyajanākīrṇaṃ yadudevagṛhollasat|| 54
अर्थ
इसके अतिरिक्त उस नगरमें वास्तुदेवताके मन्दिर और छज्जे भी बहुत सुन्दर-सुन्दर बने हुए थे। उसमें चारों वर्णके लोग निवास करते थे। और सबके बीचमें यदुवंशियोंके प्रधान उग्रसेनजी, वसुदेवजी, बलरामजी तथा भगवान् श्रीकृष्णके महल जगमगा रहे थे॥ ५४॥