श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.50.48

दशम स्कन्ध · अध्याय 50 · अथ पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

आवयोर्युध्यतोरस्य यद्यागन्ता जरासुतः।

बन्धून् वधिष्यत्यथवा नेष्यते स्वपुरं बली॥ ४८

āvayoryudhyatorasya yadyāgantā jarāsutaḥ|

bandhūn vadhiṣyatyathavā neṣyate svapuraṃ balī|| 48

अर्थ

यदि हम दोनों भाई इसके साथ लड़नेमें लग गये और उसी समय जरासन्ध भी आ पहुँचा, तो वह हमारे बन्धुओंको मार डालेगा या तो कैद करके अपने नगरमें ले जायगा; क्योंकि वह बहुत बलवान् है॥ ४८॥

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