यदि हम दोनों भाई इसके साथ लड़नेमें लग गये और उसी समय जरासन्ध भी आ पहुँचा, तो वह हमारे बन्धुओंको मार डालेगा या तो कैद करके अपने नगरमें ले जायगा; क्योंकि वह बहुत बलवान् है॥ ४८॥
आवयोर्युध्यतोरस्य यद्यागन्ता जरासुतः।
बन्धून् वधिष्यत्यथवा नेष्यते स्वपुरं बली॥ ४८
यदि हम दोनों भाई इसके साथ लड़नेमें लग गये और उसी समय जरासन्ध भी आ पहुँचा, तो वह हमारे बन्धुओंको मार डालेगा या तो कैद करके अपने नगरमें ले जायगा; क्योंकि वह बहुत बलवान् है॥ ४८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.50.48 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 451) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/50/48/