अक्रूरजीने देखा कि शेषजीकी गोदमें श्याम मेघके समान घनश्याम विराजमान हो रहे हैं। वे रेशमी पीताम्बर पहने हुए हैं। बड़ी ही शान्त चतुर्भुज मूर्ति है और कमलके रक्तदलके समान रतनारे नेत्र हैं॥ ४६॥✎ 14331434
तस्योत्संगे घनश्यामं पीतकौशेयवाससम्।
पुरुषं चतुर्भुजं शान्तं पद्मपत्रारुणेक्षणम्॥ ४६
अक्रूरजीने देखा कि शेषजीकी गोदमें श्याम मेघके समान घनश्याम विराजमान हो रहे हैं। वे रेशमी पीताम्बर पहने हुए हैं। बड़ी ही शान्त चतुर्भुज मूर्ति है और कमलके रक्तदलके समान रतनारे नेत्र हैं॥ ४६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.39.46 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 379) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/39/46/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1433 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): ब्रह्महृद) → ब्रह्मह्रद)