एक पूतना बन गयी, तो दूसरी श्रीकृष्ण बनकर उसका स्तन पीने लगीं। कोई छकड़ा बन गयी, तो किसीने बालकृष्ण बनकर रोते हुए उसे पैरकी ठोकर मारकर उलट दिया॥ १५॥✎ 1431
कस्याश्चित् पूतनायन्त्याः कृष्णायन्त्यपिबत् स्तनम्।
तोकायित्वा रुदत्यन्या पदाहञ्छकटायतीम्॥ १५
एक पूतना बन गयी, तो दूसरी श्रीकृष्ण बनकर उसका स्तन पीने लगीं। कोई छकड़ा बन गयी, तो किसीने बालकृष्ण बनकर रोते हुए उसे पैरकी ठोकर मारकर उलट दिया॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.30.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 319) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/30/15/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)