श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.30.14

दशम स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

इत्युन्मत्तवचो गोप्यः कृष्णान्वेषणकातराः।

लीला भगवतस्तास्ता ह्यनुचक्रुस्तदात्मिकाः॥ १४

ityunmattavaco gopyaḥ kṛṣṇānveṣaṇakātarāḥ|

līlā bhagavatastāstā hyanucakrustadātmikāḥ|| 14

अर्थ

परीक्षित्! इस प्रकार मतवाली गोपियाँ प्रलाप करती हुई भगवान् श्रीकृष्णको ढूँढ़ते-ढूँढ़ते कातर हो रही थीं। अब और भी गाढ़ आवेश हो जानेके कारण वे भगवन्मय होकर भगवान्‌की विभिन्‍न लीलाओंका अनुकरण करने लगीं॥ १४॥✎ 1431

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1431 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): लगी। → लगीं।

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