श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.30.16

दशम स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

दैत्यायित्वा जहारान्यामेका कृष्णार्भभावनाम्।

रिङ्गयामास काप्यङ्‌घ्री कर्षन्ती घोषनिःस्वनैः॥ १६

daityāyitvā jahārānyāmekā kṛṣṇārbhabhāvanām|

riṅgayāmāsa kāpyaṅghrī karṣantī ghoṣaniḥsvanaiḥ|| 16

अर्थ

कोई सखी बालकृष्ण बनकर बैठ गयी तो कोई तृणावर्त दैत्यका रूप धारण करके उसे हर ले गयी। कोई गोपी पाँव घसीट-घसीटकर घुटनोंके बल बकैयाँ चलने लगी और उस समय उसके पायजेब रुनझुन-रुनझुन बोलने लगे॥ १६॥✎ 1431

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1431 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): लगी। → लगीं।

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