श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.13.21

दशम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

तत्तद्वत्सान् पृथङ्नीत्वा तत्तद्गोष्ठे निवेश्य सः।

तत्तदात्माभवद् राजंस्तत्तत्सद्म प्रविष्टवान्॥ २१

tattadvatsān pṛthaṅnītvā tattadgoṣṭhe niveśya saḥ|

tattadātmābhavad rājaṃstattatsadma praviṣṭavān|| 21

अर्थ

परीक्षित्! जिस ग्वालबालके जो बछड़े थे, उन्हें उसी ग्वालबालके रूपसे अलग-अलग ले जाकर उसकी बाखलमें घुसा दिया और विभिन्‍न बालकोंके रूपमें उनके भिन्‍न-भिन्‍न घरोंमें चले गये॥ २१॥✎ 1419 2069

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1419 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): छींके → छीके
  • #2069 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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