श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.11.17

दशम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

प्रतीक्षते त्वां दाशार्ह भोक्ष्यमाणो व्रजाधिपः।

एह्यावयोः प्रियं धेहि स्वगृहान् यात बालकाः॥ १७

pratīkṣate tvāṃ dāśārha bhokṣyamāṇo vrajādhipaḥ|

ehyāvayoḥ priyaṃ dhehi svagṛhān yāta bālakāḥ|| 17

अर्थ

बेटा बलराम! व्रजराज भोजन करनेके लिये बैठ गये हैं; परन्तु अभीतक तुम्हारी बाट देख रहे हैं। आओ, अब हमें आनन्दित करो। बालको! अब तुमलोग भी अपने-अपने घर जाओ॥ १७॥✎ 1413

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1413 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): माँका → माका

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