बेटा! देखो तो सही, तुम्हारा एक-एक अंग धूलसे लथपथ हो रहा है। आओ, जल्दीसे स्नान कर लो। आज तुम्हारा जन्म नक्षत्र है। पवित्र होकर ब्राह्मणोंको गोदान करो॥ १८॥✎ 1413
धूलिधूसरितांगस्त्वं पुत्र मज्जनमावह।
जन्मर्क्षमद्य भवतो विप्रेभ्यो देहि गाः शुचिः॥ १८
बेटा! देखो तो सही, तुम्हारा एक-एक अंग धूलसे लथपथ हो रहा है। आओ, जल्दीसे स्नान कर लो। आज तुम्हारा जन्म नक्षत्र है। पवित्र होकर ब्राह्मणोंको गोदान करो॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.11.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 198) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/11/18/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)