॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक POST.4.34
सामर्थ्यधनविज्ञानाभावादत्यन्तदुर्लभा।
तस्मात्तैरपि संसेव्या श्रीमद्भागवती कथा॥ ३४
sāmarthyadhanavijñānābhāvādatyantadurlabhā|
tasmāttairapi saṃsevyā śrīmadbhāgavatī kathā|| 34
अर्थ
इनके अतिरिक्त जो लोग विषयोंमें ही रमण करनेवाले हैं, सांसारिक सुखोंकी ही जिन्हें सदा चाह रहती है, उनके लिये भी अब इस कलियुगमें सामर्थ्य, धन और विधि-विधानका ज्ञान न होनेके कारण कर्ममार्ग (यज्ञादि)से मिलनेवाली सिद्धि अत्यन्त दुर्लभ हो गयी है। ऐसी दशामें उन्हें भी सब प्रकारसे अब इस भागवतकथाका ही सेवन करना चाहिये॥ ३३-३४॥✎ 1821