॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक POST.4.33
ये चापि विषयारामाः सांसारिकसुखस्पृहाः।
तेषां तु कर्ममार्गेण या सिद्धिः साधुना कलौ॥ ३३
ye cāpi viṣayārāmāḥ sāṃsārikasukhaspṛhāḥ|
teṣāṃ tu karmamārgeṇa yā siddhiḥ sādhunā kalau|| 33
अर्थ
इनके अतिरिक्त जो लोग विषयोंमें ही रमण करनेवाले हैं, सांसारिक सुखोंकी ही जिन्हें सदा चाह रहती है, उनके लिये भी अब इस कलियुगमें सामर्थ्य, धन और विधि-विधानका ज्ञान न होनेके कारण कर्ममार्ग (यज्ञादि)से मिलनेवाली सिद्धि अत्यन्त दुर्लभ हो गयी है। ऐसी दशामें उन्हें भी सब प्रकारसे अब इस भागवतकथाका ही सेवन करना चाहिये॥ ३३-३४॥✎ 1821