श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.4.23

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

अथ भारतभूस्थाने श्रीभागवतसेवने।

विधिं शृणुत भो विप्रा येन स्यात् सुखसन्ततिः॥ २३

atha bhāratabhūsthāne śrībhāgavatasevane|

vidhiṃ śṛṇuta bho viprā yena syāt sukhasantatiḥ|| 23

अर्थ

विप्रगण! अब मैं भारतवर्षकी भूमिपर श्रीमद्भागवत-कथाका सेवन करनेके लिये जो आवश्यक विधि है, उसे बतलाता हूँ; आप सुनें। इस विधिके पालनसे श्रोताकी सुख-परम्पराका विस्तार होता है॥ २३॥

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