श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.4.24

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

राजसं सात्त्विकं चापि तामसं निर्गुणं तथा।

चतुर्विधं तु विज्ञेयं श्रीभागवतसेवनम्॥ २४

rājasaṃ sāttvikaṃ cāpi tāmasaṃ nirguṇaṃ tathā|

caturvidhaṃ tu vijñeyaṃ śrībhāgavatasevanam|| 24

अर्थ

श्रीमद्भागवतका सेवन चार प्रकारका है—सात्त्विक, राजस, तामस और निर्गुण॥ २४॥

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