श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.4.22

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

भगवन्मतिरनपेक्षः सुहृदो दीनेषु सानुकम्पो यः।

बहुधा बोधनचतुरो वक्ता सम्मानितो मुनिभिः॥ २२

bhagavanmatiranapekṣaḥ suhṛdo dīneṣu sānukampo yaḥ|

bahudhā bodhanacaturo vaktā sammānito munibhiḥ|| 22

अर्थ

अब वक्ताके लक्षण बतलाते हैं। जिसका मन सदा भगवान्‌में लगा रहे, जिसे किसी भी वस्तुकी अपेक्षा न हो, जो सबका सुहृद् और दीनोंपर दया करनेवाला हो तथा अनेकों युक्तियोंसे तत्त्वका बोध करा देनेमें चतुर हो, उसी वक्ताका मुनिलोग भी सम्मान करते हैं॥ २२॥

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