॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक POST.4.22
भगवन्मतिरनपेक्षः सुहृदो दीनेषु सानुकम्पो यः।
बहुधा बोधनचतुरो वक्ता सम्मानितो मुनिभिः॥ २२
bhagavanmatiranapekṣaḥ suhṛdo dīneṣu sānukampo yaḥ|
bahudhā bodhanacaturo vaktā sammānito munibhiḥ|| 22
अर्थ
अब वक्ताके लक्षण बतलाते हैं। जिसका मन सदा भगवान्में लगा रहे, जिसे किसी भी वस्तुकी अपेक्षा न हो, जो सबका सुहृद् और दीनोंपर दया करनेवाला हो तथा अनेकों युक्तियोंसे तत्त्वका बोध करा देनेमें चतुर हो, उसी वक्ताका मुनिलोग भी सम्मान करते हैं॥ २२॥