श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.73

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

गोवर्धननिकुंजेषु गोषु वृन्दावनादिषु।

नित्यं कृष्णेन मोदन्ते दृश्यन्ते प्रेमतत्परैः॥ ७३

govardhananikuṃjeṣu goṣu vṛndāvanādiṣu|

nityaṃ kṛṣṇena modante dṛśyante prematatparaiḥ|| 73

अर्थ

वे सभी सदा ही गोवर्धन-पर्वतके कुंज और झाड़ियोंमें, वृन्दावन-काम्यवन आदि वनोंमें तथा वहाँकी दिव्य गौओंके बीचमें श्रीकृष्णके साथ विचरते हुए अनन्त आनन्दका अनुभव करते रहते हैं। जो लोग श्रीकृष्णके प्रेममें म‌ग्‍न हैं, उन भावुक भक्तोंको उनके दर्शन भी होते हैं॥ ७३॥

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