इनके अतिरिक्त भी जो श्रोतागण वहाँ उपस्थित थे वे भी भगवान्की नित्य अन्तरंगलीलामें सम्मिलित होकर इस स्थूल व्यावहारिक जगत्से तत्काल अन्तर्धान हो गये॥ ७२॥
येऽन्ये च तत्र ते सर्वे नित्यलीलान्तरं गताः।
व्यावहारिकलोकेभ्यः सद्योऽदर्शनमागताः॥ ७२
इनके अतिरिक्त भी जो श्रोतागण वहाँ उपस्थित थे वे भी भगवान्की नित्य अन्तरंगलीलामें सम्मिलित होकर इस स्थूल व्यावहारिक जगत्से तत्काल अन्तर्धान हो गये॥ ७२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.72 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 1001) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/3/72/