श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.66

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

वज्रस्तु निजराज्येशं प्रतिबाहुं विधाय च।

तत्रैव मातृभिः साकं तस्थौ भागवताशया॥ ६६

vajrastu nijarājyeśaṃ pratibāhuṃ vidhāya ca|

tatraiva mātṛbhiḥ sākaṃ tasthau bhāgavatāśayā|| 66

अर्थ

इधर वज्रने भी अपने पुत्र प्रतिबाहुको अपनी राजधानी मथुराका राजा बना दिया और माताओंको साथ ले उसी स्थानपर, जहाँ उद्धवजी प्रकट हुए थे, जाकर श्रीमद्भागवत सुननेकी इच्छासे रहने लगे॥ ६६॥

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