॥ श्रीहरिः ॥
अथ वृन्दावने मासं गोवर्धनसमीपतः।
श्रीमद्भागवतास्वादस्तूद्धवेन प्रवर्तितः॥ ६७
atha vṛndāvane māsaṃ govardhanasamīpataḥ|
śrīmadbhāgavatāsvādastūddhavena pravartitaḥ|| 67
अर्थ
तदनन्तर उद्धवजीने वृन्दावनमें गोवर्धनपर्वतके निकट एक महीनेतक श्रीमद्भागवत-कथाके रसकी धारा बहायी॥ ६७॥
अथ वृन्दावने मासं गोवर्धनसमीपतः।
श्रीमद्भागवतास्वादस्तूद्धवेन प्रवर्तितः॥ ६७
तदनन्तर उद्धवजीने वृन्दावनमें गोवर्धनपर्वतके निकट एक महीनेतक श्रीमद्भागवत-कथाके रसकी धारा बहायी॥ ६७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.67 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 1001) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/3/67/