श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.65

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

तस्मात्त्वं गच्छ राजेन्द्र कलिनिग्रहमाचर।

सूत उवाच

इत्युक्तस्तं परिक्रम्य गतो राजा दिशां जये॥ ६५

ityuktastaṃ parikramya gato rājā diśāṃ jaye|| 65

अर्थ

सूतजी कहते हैं—उद्धवजीके इस प्रकार कहनेपर राजा परीक्षित‍्ने उनकी परिक्रमा करके उन्हें प्रणाम किया और दिग्विजयके लिये चले गये॥ ६५॥

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