श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.46

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

विरहार्त्तासु गोपीषु स्वयं नित्यविहारिणा।

श्रीभागवतसन्देशो मन्मुखेन प्रयोजितः॥ ४६

virahārttāsu gopīṣu svayaṃ nityavihāriṇā|

śrībhāgavatasandeśo manmukhena prayojitaḥ|| 46

अर्थ

यद्यपि भगवान् अपने लीलापरिकरोंके साथ नित्य विहार करते रहते हैं, इसलिये गोपियोंका श्रीकृष्णसे कभी भी वियोग नहीं होता; तथापि जो भ्रमसे विरहवेदनाका अनुभव कर रही थीं, उन गोपियोंके प्रति भगवान्‌ने मेरे मुखसे भागवतका सन्देश कहलाया॥ ४६॥

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