श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.45

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

तावतैव बभूवाहं कृष्णस्य दयितः सखा।

कृष्णेनाथ नियुक्तोऽहं व्रजे स्वप्रेयसीगणे॥ ४५

tāvataiva babhūvāhaṃ kṛṣṇasya dayitaḥ sakhā|

kṛṣṇenātha niyukto'haṃ vraje svapreyasīgaṇe|| 45

अर्थ

उतनेसे ही मैं भगवान् श्रीकृष्णका प्रियतम सखा हो गया। इसके पश्‍चात् भगवान्‌ने मुझे व्रजमें अपनी प्रियतमा गोपियोंकी सेवामें नियुक्त किया॥ ४५॥

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