प्रवृत्त्या च निवृत्त्या च कर्मज्ञानप्रयोजनात्॥ २९
prajānāṃ pālanaṃ deva kariṣyāmi yathocitam|
pravṛttyā ca nivṛttyā ca karmajñānaprayojanāt|| 29
अर्थ
विष्णुने कहा—देव! मैं आपकी आज्ञाके अनुसार कर्म और ज्ञानके उद्देश्यसे प्रवृत्ति और निवृत्तिके द्वारा यथोचित रूपसे प्रजाओंका पालन करूँगा॥ २९॥
प्रजानां पालनं देव करिष्यामि यथोचितम्।
प्रवृत्त्या च निवृत्त्या च कर्मज्ञानप्रयोजनात्॥ २९
विष्णुने कहा—देव! मैं आपकी आज्ञाके अनुसार कर्म और ज्ञानके उद्देश्यसे प्रवृत्ति और निवृत्तिके द्वारा यथोचित रूपसे प्रजाओंका पालन करूँगा॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 997) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/3/29/