॥ श्रीहरिः ॥
यदा यदैव कालेन धर्मग्लानिर्भविष्यति।
धर्मं संस्थापयिष्यामि ह्यवतारैस्तदा तदा॥ ३०
yadā yadaiva kālena dharmaglānirbhaviṣyati|
dharmaṃ saṃsthāpayiṣyāmi hyavatāraistadā tadā|| 30
अर्थ
कालक्रमसे जब-जब धर्मकी हानि होगी, तब-तब अनेकों अवतार धारण कर पुनः धर्मकी स्थापना करूँगा॥ ३०॥
यदा यदैव कालेन धर्मग्लानिर्भविष्यति।
धर्मं संस्थापयिष्यामि ह्यवतारैस्तदा तदा॥ ३०
कालक्रमसे जब-जब धर्मकी हानि होगी, तब-तब अनेकों अवतार धारण कर पुनः धर्मकी स्थापना करूँगा॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 997) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/3/30/