श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.28

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

विष्णुरप्यर्थयामास पुमांसं स्वार्थसिद्धये।

प्रजानां पालने पुंसा यदनेनापि कल्पितः॥ २८

viṣṇurapyarthayāmāsa pumāṃsaṃ svārthasiddhaye|

prajānāṃ pālane puṃsā yadanenāpi kalpitaḥ|| 28

अर्थ

ब्रह्माजीकी ही भाँति विष्णुने भी अपने अभीष्ट अर्थकी सिद्धिके लिये उन परमपुरुष परमात्मासे प्रार्थना की; क्योंकि उन पुरुषोत्तमने विष्णुको भी प्रजा-पालनरूप कर्ममें नियुक्त किया था॥ २८॥

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