श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.27

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

श्रीभागवतसप्ताहसेवनाप्तमनोरथः ।

सृष्टिं वितनुते नित्यं ससप्ताहः पुनः पुनः॥ २७

śrībhāgavatasaptāhasevanāptamanorathaḥ |

sṛṣṭiṃ vitanute nityaṃ sasaptāhaḥ punaḥ punaḥ|| 27

अर्थ

सप्ताहयज्ञकी विधिसे सात दिनोंतक श्रीमद्भागवतका सेवन करनेसे ब्रह्माजीके सभी मनोरथ पूर्ण हो गये। इससे वे सदा भगवत्स्मरणपूर्वक सृष्टिका विस्तार करते और बारंबार सप्ताहयज्ञका अनुष्ठान करते रहते हैं॥ २७॥

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