श्रीमद्भागवतकी परम्परा और उसका माहात्म्य, भागवतश्रवणसे श्रोताओंको भगवद्धामकी प्राप्ति
सूत उवाच
अथोद्धवस्तु तान् दृष्ट्वा कृष्णकीर्तनतत्परान्।
सत्कृत्याथ परिष्वज्य परीक्षितमुवाच ह॥ १
athoddhavastu tān dṛṣṭvā kṛṣṇakīrtanatatparān|
satkṛtyātha pariṣvajya parīkṣitamuvāca ha|| 1
अर्थ
सूतजी कहते हैं—उद्धवजीने वहाँ एकत्र हुए सब लोगोंको श्रीकृष्णकीर्तनमें लगा देखकर सभीका सत्कार किया और राजा परीक्षित्को हृदयसे लगाकर कहा॥ १॥✎ 1462
अथोद्धवस्तु तान् दृष्ट्वा कृष्णकीर्तनतत्परान्।
सत्कृत्याथ परिष्वज्य परीक्षितमुवाच ह॥ १
सूतजी कहते हैं—उद्धवजीने वहाँ एकत्र हुए सब लोगोंको श्रीकृष्णकीर्तनमें लगा देखकर सभीका सत्कार किया और राजा परीक्षित्को हृदयसे लगाकर कहा॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 993) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/3/1/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1462 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पराक्षित्को → परीक्षित्को