श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.1

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

अथ तृतीयोऽध्यायः

श्रीमद्भागवतकी परम्परा और उसका माहात्म्य, भागवतश्रवणसे
श्रोताओंको भगवद्धामकी प्राप्ति

सूत उवाच

अथोद्धवस्तु तान् दृष्ट्वा कृष्णकीर्तनतत्परान्।

सत्कृत्याथ परिष्वज्य परीक्षितमुवाच ह॥ १

athoddhavastu tān dṛṣṭvā kṛṣṇakīrtanatatparān|

satkṛtyātha pariṣvajya parīkṣitamuvāca ha|| 1

अर्थ

सूतजी कहते हैं—उद्धवजीने वहाँ एकत्र हुए सब लोगोंको श्रीकृष्णकीर्तनमें लगा देखकर सभीका सत्कार किया और राजा परीक्षित‍्को हृदयसे लगाकर कहा॥ १॥✎ 1462

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1462 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पराक्षित‍्को → परीक्षित‍्को

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