॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक POST.2.35
क्षणेनागतविज्ञाना दृष्ट्वा श्रीकृष्णरूपिणम्।
उद्धवं पूजयांचक्रुः प्रतिलब्धमनोरथाः॥ ३५
kṣaṇenāgatavijñānā dṛṣṭvā śrīkṛṣṇarūpiṇam|
uddhavaṃ pūjayāṃcakruḥ pratilabdhamanorathāḥ|| 35
अर्थ
थोड़ी देर बाद जब उनकी चेतना दिव्य लोकसे नीचे आयी, अर्थात् जब उन्हें होश हुआ तब उद्धवजीको भगवान् श्रीकृष्णके स्वरूपमें उपस्थित देख, अपना मनोरथ पूर्ण हो जानेके कारण प्रसन्न हो, वे उनकी पूजा करने लगे॥ ३५॥
इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां द्वितीये वैष्णवखण्डे
श्रीमद्भागवतमाहात्म्ये गोवर्धनपर्वतसमीपे परीक्षिदादीनामुद्धव-
दर्शनवर्णनं नाम द्वितीयोऽध्यायः॥ २॥