श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.2.29

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

विष्णुरातस्तु तच्छ्रुत्वा प्रसन्‍नस्तद्युतस्तदा।

तत्रैवागत्य तत् सर्वं कारयामास सत्वरम्॥ २९

viṣṇurātastu tacchrutvā prasannastadyutastadā|

tatraivāgatya tat sarvaṃ kārayāmāsa satvaram|| 29

अर्थ

सब बातें सुनकर परीक्षित‍्को बड़ी प्रसन्‍नता हुई और उन्होंने वज्रनाभ तथा श्रीकृष्णपत्‍नियोंको उसी समय साथ ले उस स्थानपर पहुँचकर तत्काल वह सब कार्य आरम्भ करवा दिया, जो कि यमुनाजीने बताया था॥ २९॥✎ 1460 1461

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1460 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पराक्षित‍्को → परीक्षित‍्को
  • #1461 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: लौट-कर → लौटकर

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