श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.2.19

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

श्रीकृष्णपत्‍न्य ऊचुः

धन्यासि सखि कान्तेन यस्या नैवास्ति विच्युतिः।

यतस्ते स्वार्थसंसिद्धिस्तस्या दास्यो बभूविम॥ १९

dhanyāsi sakhi kāntena yasyā naivāsti vicyutiḥ|

yataste svārthasaṃsiddhistasyā dāsyo babhūvima|| 19

अर्थ

श्रीकृष्णपत्‍नियोंने कहा—सखी! तुम्हारा ही जीवन धन्य है; क्योंकि तुम्हें कभी भी अपने प्राणनाथके वियोगका दुःख नहीं भोगना पड़ता। जिन श्रीराधिकाजीकी कृपासे तुम्हारे अभीष्ट अर्थकी सिद्धि हुई है, उनकी अब हमलोग भी दासी हुईं॥ १९॥

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