किन्तु तुम अभी कह चुकी हो कि उद्धवजीके मिलनेपर ही हमारे सभी मनोरथ पूर्ण होंगे; इसलिये कालिन्दी! अब ऐसा कोई उपाय बताओ, जिससे उद्धवजी भी शीघ्र ही मिल जायँ॥ २०॥
परन्तूद्धवलाभे स्यादस्मत्सर्वार्थसाधनम्।
तथा वदस्व कालिन्दि तल्लाभोऽपि यथा भवेत्॥ २०
किन्तु तुम अभी कह चुकी हो कि उद्धवजीके मिलनेपर ही हमारे सभी मनोरथ पूर्ण होंगे; इसलिये कालिन्दी! अब ऐसा कोई उपाय बताओ, जिससे उद्धवजी भी शीघ्र ही मिल जायँ॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.2.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 991) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/2/20/