श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.1.11

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

कोशसैन्यादिजा चिन्ता तथारिदमनादिजा।

मनागपि न कार्या ते सुसेव्याः किन्तु मातरः॥ ११

kośasainyādijā cintā tathāridamanādijā|

manāgapi na kāryā te susevyāḥ kintu mātaraḥ|| 11

अर्थ

तुम्हें अपने खजानेकी, सेनाकी तथा शत्रुओंको दबाने आदिकी तनिक भी चिन्ता न करनी चाहिये। तुम्हारे लिये कोई कर्तव्य है तो केवल एक ही; वह यह कि तुम्हें अपनी इन माताओंकी खूब प्रेमसे भलीभाँति सेवा करते रहना चाहिये॥ ११॥

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