यदि कभी तुम्हारे ऊपर कोई आपत्ति-विपत्ति आये अथवा किसी कारणवश तुम्हारे हृदयमें अधिक क्लेशका अनुभव हो तो मुझसे बताकर निश्चिन्त हो जाना; मैं तुम्हारी सारी चिन्ताएँ दूर कर दूँगा।’ सम्राट् परीक्षित्की यह बात सुनकर वज्रनाभको बड़ी प्रसन्नता हुई। उन्होंने राजा परीक्षित्से कहा—॥ १२॥
निवेद्य मयि कर्तव्यं सर्वाधिपरिवर्जनम्।
श्रुत्वैतत् परमप्रीतो वज्रस्तं प्रत्युवाच ह॥ १२
यदि कभी तुम्हारे ऊपर कोई आपत्ति-विपत्ति आये अथवा किसी कारणवश तुम्हारे हृदयमें अधिक क्लेशका अनुभव हो तो मुझसे बताकर निश्चिन्त हो जाना; मैं तुम्हारी सारी चिन्ताएँ दूर कर दूँगा।’ सम्राट् परीक्षित्की यह बात सुनकर वज्रनाभको बड़ी प्रसन्नता हुई। उन्होंने राजा परीक्षित्से कहा—॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.1.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 984) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/1/12/