श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.1.12

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

निवेद्य मयि कर्तव्यं सर्वाधिपरिवर्जनम्।

श्रुत्वैतत् परमप्रीतो वज्रस्तं प्रत्युवाच ह॥ १२

nivedya mayi kartavyaṃ sarvādhiparivarjanam|

śrutvaitat paramaprīto vajrastaṃ pratyuvāca ha|| 12

अर्थ

यदि कभी तुम्हारे ऊपर कोई आपत्ति-विपत्ति आये अथवा किसी कारणवश तुम्हारे हृदयमें अधिक क्लेशका अनुभव हो तो मुझसे बताकर निश्‍चिन्त हो जाना; मैं तुम्हारी सारी चिन्ताएँ दूर कर दूँगा।’ सम्राट् परीक्षित‍्की यह बात सुनकर वज्रनाभको बड़ी प्रसन्‍नता हुई। उन्होंने राजा परीक्षित‍्से कहा—॥ १२॥

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