॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.6.99
स्वपुरुषमपि वीक्ष्य पाशहस्तं वदति यमः किल तस्य कर्णमूले।
परिहर भगवत्कथासु मत्तान् प्रभुरहमन्यनृणां न वैष्णवानाम्॥ ९९
svapuruṣamapi vīkṣya pāśahastaṃ vadati yamaḥ kila tasya karṇamūle|
parihara bhagavatkathāsu mattān prabhurahamanyanṛṇāṃ na vaiṣṇavānām|| 99
अर्थ
अपने दूतको हाथमें पाश लिये देखकर यमराज उसके कानमें कहते हैं—‘देखो, जो भगवान्की कथा-वार्तामें मत्त हो रहे हों, उनसे दूर रहना; मैं औरोंको ही दण्ड देनेकी शक्ति रखता हूँ, वैष्णवोंको नहीं’॥ ९९॥ ✎ 21