श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.99

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

स्वपुरुषमपि वीक्ष्य पाशहस्तं वदति यमः किल तस्य कर्णमूले।

परिहर भगवत्कथासु मत्तान् प्रभुरहमन्यनृणां न वैष्णवानाम्॥ ९९

svapuruṣamapi vīkṣya pāśahastaṃ vadati yamaḥ kila tasya karṇamūle|

parihara bhagavatkathāsu mattān prabhurahamanyanṛṇāṃ na vaiṣṇavānām|| 99

अर्थ

अपने दूतको हाथमें पाश लिये देखकर यमराज उसके कानमें कहते हैं—‘देखो, जो भगवान्‌की कथा-वार्तामें मत्त हो रहे हों, उनसे दूर रहना; मैं औरोंको ही दण्ड देनेकी शक्ति रखता हूँ, वैष्णवोंको नहीं’॥ ९९॥ ✎ 21

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #21 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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