श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.56

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

एवं नगाहयज्ञेऽस्मिन् समाप्ते श्रोतृभिस्तदा।

पुस्तकस्य च वक्तुश्‍च पूजा कार्यातिभक्तितः॥ ५६

evaṃ nagāhayajñe'smin samāpte śrotṛbhistadā|

pustakasya ca vaktuśca pūjā kāryātibhaktitaḥ|| 56

अर्थ

इस प्रकार जब सप्ताहयज्ञ समाप्त हो जाय, तब श्रोताओंको अत्यन्त भक्तिपूर्वक पुस्तक और वक्ताकी पूजा करनी चाहिये॥ ५६॥

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