किन्तु जो भगवान्के अकिंचन भक्त हैं, उनके लिये उद्यापनका कोई आग्रह नहीं है। वे श्रवणसे ही पवित्र हैं; क्योंकि वे तो निष्काम भगवद्भक्त हैं॥ ५५॥
अकिञ्चनेषु भक्तेषु प्रायो नोद्यापनाग्रहः।
श्रवणेनैव पूतास्ते निष्कामा वैष्णवा यतः॥ ५५
किन्तु जो भगवान्के अकिंचन भक्त हैं, उनके लिये उद्यापनका कोई आग्रह नहीं है। वे श्रवणसे ही पवित्र हैं; क्योंकि वे तो निष्काम भगवद्भक्त हैं॥ ५५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.55 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 75) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/6/55/