श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.20

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

विरक्तो वैष्णवो विप्रो वेदशास्त्रविशुद्धिकृत्।

दृष्टान्तकुशलो धीरो वक्ता कार्योऽतिनिःस्पृहः॥ २०

virakto vaiṣṇavo vipro vedaśāstraviśuddhikṛt|

dṛṣṭāntakuśalo dhīro vaktā kāryo'tiniḥspṛhaḥ|| 20

अर्थ

जो वेद-शास्त्रकी स्पष्ट व्याख्या करनेमें समर्थ हो, तरह-तरहके दृष्टान्त दे सकता हो तथा विवेकी और अत्यन्त निःस्पृह हो, ऐसे विरक्त और विष्णुभक्त ब्राह्मणको वक्ता बनाना चाहिये॥ २०॥✎ 1271

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
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