श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.19

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

अथवा पूर्वदिग्ज्ञेया पूज्यपूजकमध्यतः।

श्रोतॄणामागमे प्रोक्ता देशकालादिकोविदैः॥ १९

athavā pūrvadigjñeyā pūjyapūjakamadhyataḥ|

śrotṝṇāmāgame proktā deśakālādikovidaiḥ|| 19

अर्थ

अथवा वक्ता और श्रोताको पूर्वमुख होकर बैठना चाहिये। देश-काल आदिको जाननेवाले महानुभावोंने श्रोताके लिये ऐसा ही नियम बताया है॥ १९॥✎ 1271

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
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