श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.15

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

फलपुष्पदलैर्विष्वग्वितानेन विराजितः।

चतुर्दिक्षु ध्वजारोपो बहुसम्पद्विराजितः॥ १५

phalapuṣpadalairviṣvagvitānena virājitaḥ|

caturdikṣu dhvajāropo bahusampadvirājitaḥ|| 15

अर्थ

उसे सब ओर फल, पुष्प, पत्र और चँदोवेसे अलंकृत करे तथा चारों ओर झंडियाँ लगाकर तरह-तरहके सामानोंसे सजा दे॥ १५॥✎ 1271

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1271 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): ऊँचाई-पर → ऊँचाईपर

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