॥ श्रीहरिः ॥
इतिहासमिमं पुण्यं शाण्डिल्योऽपि मुनीश्वरः।
पठते चित्रकूटस्थो ब्रह्मानन्दपरिप्लुतः॥ ८९
itihāsamimaṃ puṇyaṃ śāṇḍilyo'pi munīśvaraḥ|
paṭhate citrakūṭastho brahmānandapariplutaḥ|| 89
अर्थ
इस परम पवित्र इतिहासका पाठ चित्रकूटपर विराजमान मुनीश्वर शाण्डिल्य भी ब्रह्मानन्दमें मग्न होकर करते रहते हैं॥ ८९॥
इतिहासमिमं पुण्यं शाण्डिल्योऽपि मुनीश्वरः।
पठते चित्रकूटस्थो ब्रह्मानन्दपरिप्लुतः॥ ८९
इस परम पवित्र इतिहासका पाठ चित्रकूटपर विराजमान मुनीश्वर शाण्डिल्य भी ब्रह्मानन्दमें मग्न होकर करते रहते हैं॥ ८९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.5.89 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 70) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/5/89/