श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.90

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

आख्यानमेतत्परमं पवित्रं श्रुतं सकृद्वै विदहेदघौघम्।

श्राद्धे प्रयुक्तं पितृतृप्तिमावहेन्‍नित्यं सुपाठादपुनर्भवं च॥ ९०✎ 1498

ākhyānametatparamaṃ pavitraṃ śrutaṃ sakṛdvai vidahedaghaugham|

śrāddhe prayuktaṃ pitṛtṛptimāvahennityaṃ supāṭhādapunarbhavaṃ ca|| 90

अर्थ

यह कथा बड़ी ही पवित्र है। एक बारके श्रवणसे ही समस्त पापराशिको भस्म कर देती है। यदि इसका श्राद्धके समय पाठ किया जाय, तो इससे पितृगणको बड़ी तृप्ति होती है और नित्य पाठ करनेसे मोक्षकी प्राप्ति होती है॥ ९०॥

इति श्रीपद्मपुराणे उत्तरखण्डे श्रीमद्भागवतमाहात्म्ये गोकर्णमोक्षवर्णनं
नाम पञ्चमोऽध्यायः॥ ५॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1498 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: पितृतृप्तिमावहे- न्‍नित्यं → पितृतृप्तिमावहेन्‍नित्यं

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