श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.88

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

वाताम्बुपर्णाशनदेहशोषणैस्तपोभिरुग्रैश्चिरकालसञ्चितैः । ✎ 1497

योगैश्‍च संयान्ति न तां गतिं वै सप्ताहगाथाश्रवणेन यान्ति याम्॥ ८८

vātāmbuparṇāśanadehaśoṣaṇaistapobhirugraiścirakālasañcitaiḥ |

yogaiśca saṃyānti na tāṃ gatiṃ vai saptāhagāthāśravaṇena yānti yām|| 88

अर्थ

जिस गतिको लोग वायु, जल या पत्ते खाकर शरीर सुखानेसे, बहुत कालतक घोर तपस्या करनेसे और योगाभ्याससे भी नहीं पा सकते, उसे वे सप्ताहश्रवणसे सहजमें ही प्राप्त कर लेते हैं॥ ८८॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1497 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: वाताम्बुपर्णाशनदेहशोषणै-स्तपोभिरुग्रैश्चिरकालसञ्चितै: → वाताम्बुपर्णाशनदेहशोषणैस्तपोभिरुग्रैश्चिरकालसञ्चितैः

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