॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.5.38
विद्वांसो योगनिष्ठाश्च ज्ञानिनो ब्रह्मवादिनः।
तन्मुक्तिं नैव तेऽपश्यन् पश्यन्तः शास्त्रसंचयान्॥ ३८ ✎ 978 979
vidvāṃso yoganiṣṭhāśca jñānino brahmavādinaḥ|
tanmuktiṃ naiva te'paśyan paśyantaḥ śāstrasaṃcayān|| 38
अर्थ
उनमें जो लोग विद्वान्, योगनिष्ठ, ज्ञानी और वेदज्ञ थे, उन्होंने भी अनेकों शास्त्रोंको उलट-पलटकर देखा; तो भी उसकी मुक्तिका कोई उपाय न मिला॥ ३८॥✎ 16