श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.39

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

ततः सर्वैः सूर्यवाक्यं तन्मुक्तौ स्थापितं परम्।

गोकर्णः स्तम्भनं चक्रे सूर्यवेगस्य वै तदा॥ ३९

tataḥ sarvaiḥ sūryavākyaṃ tanmuktau sthāpitaṃ param|

gokarṇaḥ stambhanaṃ cakre sūryavegasya vai tadā|| 39

अर्थ

तब सबने यही निश्‍चय किया कि इस विषयमें सूर्यनारायण जो आज्ञा करें, वही करना चाहिये। अतः गोकर्णने अपने तपोबलसे सूर्यकी गतिको रोक दिया॥ ३९॥✎ 16

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #16 शब्दोंके बीचका स्थान: करो,है → करो, है

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