श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.72

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

क्‍व तिष्ठामि क्‍व गच्छामि को मे दुःखं व्यपोहयेत्।

प्राणांस्त्यजामि दुःखेन हा कष्टं मम संस्थितम्॥ ७२

kva tiṣṭhāmi kva gacchāmi ko me duḥkhaṃ vyapohayet|

prāṇāṃstyajāmi duḥkhena hā kaṣṭaṃ mama saṃsthitam|| 72

अर्थ

अब मैं कहाँ रहूँ? कहाँ जाऊँ? मेरे इस संकटको कौन काटेगा? हाय! मेरे ऊपर तो बड़ी विपत्ति आ पड़ी है, इस दुःखके कारण अवश्य मुझे एक दिन प्राण छोड़ने पड़ेंगे॥ ७२॥

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