vandhyatvaṃ tu samīcīnaṃ kuputro duḥkhadāyakaḥ|| 71
अर्थ
इस प्रकार जब सारी सम्पत्ति स्वाहा हो गयी, तब उसका कृपण पिता फूट-फूटकर रोने लगा और बोला—‘इससे तो इसकी माँका बाँझ रहना ही अच्छा था; कुपुत्र तो बड़ा ही दुःखदायी होता है॥ ७१॥
तत्पिता कृपणः प्रोच्चैर्धनहीनो रुरोद ह।
वन्ध्यत्वं तु समीचीनं कुपुत्रो दुःखदायकः॥ ७१
इस प्रकार जब सारी सम्पत्ति स्वाहा हो गयी, तब उसका कृपण पिता फूट-फूटकर रोने लगा और बोला—‘इससे तो इसकी माँका बाँझ रहना ही अच्छा था; कुपुत्र तो बड़ा ही दुःखदायी होता है॥ ७१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.4.71 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 60) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/4/71/