श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.71

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

तत्पिता कृपणः प्रोच्चैर्धनहीनो रुरोद ह।

वन्ध्यत्वं तु समीचीनं कुपुत्रो दुःखदायकः॥ ७१

tatpitā kṛpaṇaḥ proccairdhanahīno ruroda ha|

vandhyatvaṃ tu samīcīnaṃ kuputro duḥkhadāyakaḥ|| 71

अर्थ

इस प्रकार जब सारी सम्पत्ति स्वाहा हो गयी, तब उसका कृपण पिता फूट-फूटकर रोने लगा और बोला—‘इससे तो इसकी माँका बाँझ रहना ही अच्छा था; कुपुत्र तो बड़ा ही दुःखदायी होता है॥ ७१॥

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