श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.73

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

तदानीं तु समागत्य गोकर्णो ज्ञानसंयुतः।

बोधयामास जनकं वैराग्यं परिदर्शयन्॥ ७३

tadānīṃ tu samāgatya gokarṇo jñānasaṃyutaḥ|

bodhayāmāsa janakaṃ vairāgyaṃ paridarśayan|| 73

अर्थ

उसी समय परम ज्ञानी गोकर्णजी वहाँ आये और उन्होंने पिताको वैराग्यका उपदेश करते हुए बहुत समझाया॥ ७३॥

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